जीवन में कभी ना कभी हम किन्हीं अपनों को खोते हैं, और तब हमें उनके साथ बीते उन लम्हों की याद आती है जिनका अहसास हम उनके साथ रहकर भी नहीं कर सके थे। जब कोई हमारा अपना हमेशा-हमेशा के लिए इस संसार से चला जाता है, तो उसके जाने का दुःख हमें अवश्य ही होता है चाहे उनसे रिश्ता कैसा भी हो। किसी स्त्री के जीवन साथी का हमेशा के लिए इस संसार से चले जाना, हर प्रकार से उसके लिए दुखदायी साबित होता है। ऐसा हो जाने पर उसके जीवन में हर प्रकार से किसी ना किसी मात्रा में क्षति होती ही है। हर समाज, हर देश में ऐसी स्त्रियाँ मौजूद हैं जो अपने जीवन साथी के अभाव में अपना जीवन व्यतीत करती हैं। अन्य देशों की भांति भारत में भी एक बड़ी संख्या में विधवा महिलाएं मौजूद हैं। जीवन-मृत्यु का यह चक्र ईश्वर का एक विधान है, जो अपना रूप कभी नहीं बदलता; परन्तु इसके चलते इंसानों में और उनके जीवन में काफी कुछ बदलाव होते रहते हैं। पति की मृत्यु के बाद यह बदलाव स्त्री के जीवन में काफी नकारात्मकता की स्थिति पैदा कर देते हैं क्योंकि किसी भी स्त्री के लिए उसके पति को भुला देना कभी भी आसान नहीं हो सकता है। इसके बाद अपने आपको ही भुला देना कितना संगत हो सकता है! ना जाने कितने लोग इस दुनिया से हर दिन चले जाते हैं। परन्तु साथ ही दुनिया में आने वालो की संख्या भी तो उतनी ही रहती हैं, यही जीवन-मृत्यु चक्र चलता रहता है । जब भी हम कुछ हासिल करते हैं तो हमारी ख़ुशी का ठिकाना नहीं होता है, किन्तु खो देना या गवां देना हमेशा ही दुखदायी होता है | हम अपनों को खो देते हैं लेकिन यह जीवन तो नहीं रुकता, यह तो फिर भी चलता ही रहता है | ऐसा ही लगता कि जैसे सब कुछ थम सा गया हो, और कुछ बाकी ना रहा हो और सच मानिये, यहीं सोचना हमें बहुत पीछे ले जा सकता है।
जीवन साथी अगर ना भी रहे तो इसका यह मतलब तो बिल्कुल भी नहीं कि व्यक्ति अपना जीवन ही त्याग दे, तो क्यों ना जीवन को सही ढंग से ही जिया जाये| हमेशा दुःख में रहना, अपने आप को ना सँभालना, सच में जीवन जीने का मतलब ही बदल सकता है तो क्यों ना जीवन को उसका सही रूप दिया जाये और जो भी हुआ उसे ईश्वर का विधान मानकर स्वीकार किया जाये। आप स्त्री हो और स्त्री को ईश्वर ने ऐसी शक्ति दी है जो हर मुसीबत और हर परेशानी में संघर्ष के साथ इस तरह से आगे बढ़ सकती है कि उनके पिछले जीवन का किसी को आभास भी नहीं होता और वो जीवन पर जीत भी हासिल कर जाती है। पति नहीं है, जीवन अकेला है और संघर्ष भी अकेले ही करना है लेकिन एक बार सोचिये कि मिलने वाली जीत भी आपकी अपनी ही होगी; इसलिए कभी भी अपने सामर्थ्य को कम ना होने दें और महसूस करें कि आप ही वो शक्ति हैं जो बड़े-बड़े दुःख या बलशाली शत्रु को भी अपने सामने नहीं टिकने देती। इतिहास इसका गवाह है, इससे अधिक कहने की आवश्यकता नहीं है।
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