वर्तमान समय की परिस्थितियों को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि हम अपने भविष्य की बेहतरी के लिए अपने विषयों का चयन अपनी रूचि के अनुसार ही करें क्योंकि हमारा गलत चयन हमारे जीवन के लिए बहुत ही दुखदायी साबित हो सकता है। सामान्यतः ऐसा होता है कि बच्चा अपने परिवार वालों की इच्छापूर्ति करने के लिए अपने लिए गलत विषयों का चुनाव कर बैठता हैं या उनका हमारे विषय को लेकर जो डर होता है वह कहीं ना कहीं हमें प्रभावित कर देता है जिसके कारण हम उन परिस्थितियों में अपने लिए गलत विषय चुन लेते हैं । कभी तो हम अपने मित्रों की संगति के लिए अपनी रुचि पर ध्यान नहीं दे पाते और यह सोच बैठते हैं कि हम भी उन्ही विषयों का चुनाव कर लेते हैं ताकि हमारी मित्रता बनी रहे । परंतु यह सब हमारे लिए बहुत गलत होता है। किसी और की रुचि में अपनी रुचि को खो देना सही नहीं है और यह बात हमारे माता-पिता को भी समझनी चाहिए कि उनके बच्चों की रूचि किसमें है और वह क्या करना चाहते हैं । जो माता-पिता पढ़े लिखे हैं वह तो अक्सर अपने बच्चों पर दबाव बनाते हैं कि उन्हें अपने भविष्य के लिये कुछ उचित विकल्प ही चुनने चाहिये लेकिन जो माता पिता ज्यादा पढ़े लिखे नही है वह ये चाहते है कि उनका बच्चा भी उनके सपने पूरे करे बस इसी दवाब में आकर बच्चे अपनी रुचि पर ध्यान नहीं दे पाता। वह वही करना चाहते हैं जो उनके माता-पिता के सपनों को पूरा कर सके और वह यह सब करते भी हैं पर कही ना कही वह अपने भविष्य से संतुष्ट नहीं हो पाते और तनावग्रसित हो जाते हैं । यह उनके लिए अत्यन्त हानिकारक साबित होता है । कई बार तो इन सबके चलते व्यक्ति मानसिक बीमारियों से पीड़ित हो जाता है और अपने अंदर एक घृणित सोच भी बना लेता है । परंतु यदि हम यह सब समय रहते रोक ले तो ये हमारे लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकता है । हमें अपने विषयों का चयन अपनी रुचियों के अनुसार ही करना है और इसके लिए हमें मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की सलाह लेनी चाहिये क्योकि एक काउंसलर ही है जो हमे सही दिशा निर्देश देते हैं । वो हमारी रुचि को पर्याप्त रूप से हमारे समक्ष रखते हैं और ये जानने में सहायता करते हैं कि हमें क्या विषय लेना चाहिये!
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